मऊ पुस्तक मेले में क्या कहा जिलाधिकारी ने

जिला प्रशासन मऊ की पहल पर वन विभाग एवं पर्यावरण विभाग के सहयोग से डी सी एस के डिग्री कालेज में प्रथम मऊ पुस्तक मेले के चैथे दिन बदलता हुआ मऊ और युवा विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए जिलाधिकारी मऊ श्री ज्ञानेन्द्र प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि मां की गोद में ही सभ्यता जन्म लेती है तथा संस्कृति विस्तार पाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से विवेक जागृत होता है तथा शिक्षा के बिना सब अधूरा है। मां शब्द नहीं संस्था है मां सृजन का आधार है। ऐसे में मा ं की प्रेरणा ही पुस्तक के करीब ले जाती है और फिर हम ज्ञान के मंदिरों के मार्ग से जीवन यात्रा को सुगम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दौर या जमाने का युवा जब अपने समय के सामाजिक सरोकारों से जुड़ता हैं तब वह जमाना ऐतिहासिक हो जाता है। उन्होंनंे कहा कि मऊ का पहला पुस्तक मेले का सूत्र वाक्य है मऊ पढे़ मऊ बढे़े।
विशिष्ट अतिथि संजय विशवाल डी एफ ओ. मऊ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में साहित्य की वृहत्तर भूमिका है। भारतीय भाषाओं का समग्र साहित्य प्रकृति वर्णन से सम्पन्न है। उन्होंने कहा कि तमसा, सरयू की गोद में बसा मऊ जनपद अगर सामाजिक रूप से सामुदायिक वानिकी की अवधारणा को साकार करें तो हरे भरे मऊ का सपना साकार हो जायेगा।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. ए के मिश्रा ने कहा कि डी सी एस के पी जी कालेज के परिसर में मऊ जिले के सभी लोगों को किताबें बुला रही हैं। जब हम साहित्य के संस्कार को पुस्तक के माध्यम से नयी पीढ़ी को जोड़ने के लिए उन्हें पुरस्कार स्वरूप पुस्तक प्रदान कर पढ़ने की आदत डालेंगें तो निश्चित ही मऊ के विद्यार्थी पुस्तक संस्कृति के उन्नययन का उदाहरण बनेंगें। डा. मिश्रा ने कहा कि अब परिसर में होने वाली सभी गतिविधियों में विद्यार्थियों को पुस्तक ही पुरस्कार स्वरूप दी जायेगी।
संस्कृतिकर्मी व लेखक राजीव रंजन ने कहा कि भारत सबसे बड़ा युवाओं का देश है ऐसे में किताबें ही युवाओं को सार्थक दिशा प्रदान करेंगी। युवा और किताबें विषय पर आयोजित संवाद युवाओं को नागरिक बोध से जागृत करेगा।
हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सर्वेश पाण्डेय ने कहा कि यह पुस्तक मेला साहित्य की सभी महत्वपूर्ण कृतियों का मेला है। डा. पाण्डेय ने कहा कि पुस्तक हमेशा से सामाजिक परिवर्तन का वाहक रही हैं और भविष्य में भी रहंेगी। विमर्श में हिस्सा लेते हुए लेखक असित मिश्रा ने कहा कि साहित्य मनुष्य की संवेदना को सृदृढ बनाती है।
संचालन करते हुए डा. सी पी राय ने कहा कि बदलता मऊ, आधुनिक मऊ की जो संकल्पना जिलाधिकारी मऊ ने प्रस्तुत की है वह अनुकरणीय है। यह पुस्तक मेला आधुनिक मऊ की भावना को साकार करने में सामाजिक जागरण का मंच बन रहा है। इस अवसर पर डा रशिका रियाज, डा. रूचिका मिश्रा सहित सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी/शिक्षक मौजूद रहे।
डी एफ ओ मऊ श्री संजय विशवाल एवं प्राचार्य डा. ए के मिश्रा ने कहा कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक मऊ पुस्तक मेले का समापन समारोह होगा। इस अवसर पर मेले में आयोजित गतिविधियों में प्रतिनिधि हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जायेगा।
प्रकाशक प्रतिनिधियों ने मऊ के लोगों को सराहा..............
साहित्य अकादमी के स्टाल से भाषान्तर अनुवाद, रचना संचयन लोगों ने खूब खरीद किया। राजकमल प्रकाशन इतिहास व समाजउपयोगी विषय, प्रकाशन संस्थान की विचार व पर्यावरण विषय, किताब घर से प्रतिनिधि कहानी, कविता एवं सादत हसन मन्टो की रचनाएं विशेष रूप से पसंद की गयी। मेधा बुक्स से सस्ता साहित्य सीरीज को विद्यार्थीयों ने खूब पसंद की । नयी किताब प्रकाशन का भारतीय नवजागरण और स्त्री सीरीज को छात्रों ने खूब खरीदा। संवाद श्रृखला को स्थानीय शिक्षक बिरादरी द्वारा ने खूब पसंद की गयी। वाणी एवं उत्कर्ष प्रकाशन के स्टाल से पेपर बैक संस्करण पंडिल दिनदयाल उपध्याल, बाबा भीमराव अंबेडकर, महात्मा गंाधी एवं विनोवा भावे और लोहिया की किताबों को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।


