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कौनसी थी एम एम 11, जिससे एसडीएम और कोतवाल भी हुए मजबूर

मोंठ/झांसी – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर पकड़ने एवं खनन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात की जा रही है, और उनकी सोच भी खनन को पूर्णता खत्म करने की है, और वह कोशिश भी लगातार कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत वह आए दिन सरकारी मशीनरी की मीटिंग कर कड़े निर्देश भी देते हैं, लेकिन उनके निर्देशों का कितना पालन होता है या सिर्फ मुख्यमंत्री के आदेशों को प्रशासन के अधिकारियों द्वारा सिर्फ नोटों की कब्र में मुख्यमंत्री के आदेशों को दफन कर दिया जाता है, जी हां हम बात कर रहे हैं, अवैध खनन की जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है, आइए हम आपको लेकर चलते हैं, उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद के तहसील मोंठ में जहां कुछ ऐसे ही हालात हैं, बीते दिन सुबह के टाइम उपजिलाधिकारी पूनम निगम तहसील प्रांगण में सफाई अभियान चला रही थी, तभी अचानक उन्हें ट्रैक्टर फर्राटे भर्ती तेजी से रोड पर निकलते हुए आवाज आई, जिसपर उन्होंने मामले को संगीनता से लिया और उन्होंने ट्रैक्टर चालकों का पीछा कर लिया, जिसपर उपजिलाधिकारी की गाड़ी देख तीन ट्रैक्टर तो मौका पाकर ट्रैक्टर लेकर फरार हो गए, जबकि दो ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकले, जिसपर उन्होंने तुरंत मोंठ पुलिस को सूचना दी, और दोनो ट्रैक्टर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, और फिर यहीं से शुरू हुआ ट्रैक्टरों के प्रपत्रों की जांच का दौर, जिसमें सत्ता पक्ष के सफेद नकाब पोशों द्वारा सुबह से लेकर अर्ध रात्रि तक नेताओं ने थाने को घेर रखा, धीरे-धीरे पुलिस का भी सब्र टूट गया, और वह सत्ता पक्ष के दबाव में आकर दोनो ट्रैक्टरों को छोड़ना पड़ा, जब इस संबंध में हमारे संवाददाता ने संबंधित थाना प्रभारी से बातचीत की तो, उन्होंने बताया कि दोनों ट्रैक्टरों की एम एम 11 थी, और ट्रैक्टरों के प्रपत्र पूर्ण थे, इसलिए ट्रैक्टरों को छोड़ना पड़ा, लेकिन फिर एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि जब ट्रैक्टर चालकों के पास पूरे प्रपत्र थे, तो उपजिलाधिकारी द्वारा पीछा करने पर ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर छोड़कर भागे क्यों, अभी यहां भी खत्म नहीं हुई थी, अगर ट्रैक्टर के प्रपत्र पूर्ण थे तो ट्रैक्टरों को थाने से दिन में ही क्यों नहीं छोड़ा गया, आखिर क्यों रात्रि होने का इंतजार किया गया, लेकिन एक बात और भी पैदा होती है कि नियमानुसार ट्रैक्टर अगर घाट से बालू लेकर चलता है, तो उसको एम एम 11 अपने साथ लेकर चलना चाहिए न कि पीछे से कोई दूसरा व्यक्ति लेकर आए, चलिए कुछ ऐसी ही चौकाने वाली और भी एक बात है, जहां से यह ट्रैक्टर पकड़े गए हैं, उस जगह से घाटों की दूरी लगभग 10 या 12 मिनट की है, और ट्रैक्टर पकड़ने के लगभग आधा घंटे बाद ट्रैक्टर मालिक या कहिए ट्रैक्टर प्रतिनिधि एम एम 11 लेकर पहुंचता है, और थानाध्यक्ष को मजबूर होकर ट्रैक्टर छोड़ना पड़ता है, अब समझने की बात यह है कि वह कौनसी एम एम 11 थी, और कितनी मोटी एम एम 11 थी कि उपजिलाधिकारी ने भी एम एम 11 को सही माना और कोतवाल साहब को भी एम एम 11 को सही मानना पड़ा, कहीं न कहीं खनन के नाम पर एक बड़ा खेल खेला जा रहा है, और इसमें तहसील स्तर से लेकर लगभग सभी प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत से अवैध खनन चरम सीमा पर चल रहा है, अभी-अभी दो दिन पहले ही झांसी जिले के नए मुखिया शिवनारायण अवस्थी ने चार्ज संभाला है, अब देखना यह होगा कि झांसी जनपद में नए मुखिया द्वारा अवैध खनन को रोका जाता है या फिर अवैध खनन यूं ही चरम सीमा पर चलता रहेगा।

REPORTER DHERENDRA RAIKWAR  

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