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TIME समाचार की खबर का हुआ असर! अवैध कब्जा करने वाले विद्यालय पर जांच शुरू

झाँसी
विद्यालय की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का एक मामला सामने आया था। जिसमें टाइम समाचार न्यूज़ चैनल ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसपर टाईम समाचार की खबर से संबंधित अधिकारियों व संबंधित विद्यालय के प्रबंधक व प्रधानाचार्य में हड़कंप मच गया था। जिसपर टाइम समाचार के रिपोर्टर को कई लोगों द्वारा फोन पर समाचार प्रकाशित नही करने की हिदायत दी गई। लेकिन आपको बता दें कि यह एक निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार की कलम है, जब-जब हमारे देश में भ्रष्टाचार एवं कानून को लाचार एवं अपंग करने की कोशिश की जाएगी। तब तब यह कलम उस दास्तान की सच्चाई अपने लहू से लिखने को मजबूर होगी।
जब इस अवैध कब्जे के पूरे मामले की जानकारी मोठ तहसील के जमीनों के लेखा जोखा के मालिक तहसीलदार श्रीराम यादव से जानकारी ली तो इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया था कि जिस जगह वह स्कूल है, वह स्कूल मेरे क्षेत्र से बाहर है, और वह क्षेत्र नगर पंचायत के अंतर्गत आता है, और इसकी जिम्मेदारी नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी की है, जब इस पूरे मामले की जानकारी मोंठ अधिशासी अधिकारी गुंजन गुप्ता से बातचीत करनी चाही तो उनका फोन कई बार लगाने के बावजूद भी नहीं उठा था।
यह था पूरा मामला—
झांसी – मोंठ ब्लॉक में एक प्रधानाचार्य द्वारा सरकारी जमीन पर शिक्षा के मंदिर की आड़ में अवैध कब्जा करके अपना निवास बनाए हैं, उसपर इमारत भी खड़ी कर दी है, वहीं पास में बने इतिहासिक कुए को भी अवैध कब्जे की चपेट में ले लिया है, और इतिहासिक बने कुए को कचरे से उसका नामोनिशान मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, वैसे भी बुंदेलखंड का जलस्तर दिनों दिन गिर रहा है, और बुंदेलखंड में बने कुओं से बारिश के समय में पानी एकत्रित होता था, जो कि जमीन में जाता था जिससे जमीन का जलस्तर बढ़ता था, लेकिन अब कुछ ऐसे ही भूमाफियों द्वारा लगातार अवैध कब्जा करके इतिहासिक कुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया है, जिससे बुंदेलखंड में किसान व जनता पानी के लिए दिनो दिन त्राहि-त्राहि कर रही है।
आपको बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा भूमाफियाओ पर कड़ी कार्रवाई करने की बात की जा रही है। और शिक्षा के मंदिरों में भी छात्रों को अच्छी शिक्षा दी जाती है, जिससे छात्र अच्छी शिक्षा ग्रहण करें और एक नया मुकाम हासिल करें, और उनको शिक्षा देने वाले गुरुओं का नाम रोशन हो सके। लेकिन क्या ऐसा संभव है, जब शिक्षा देने वाले एवँ शिक्षा का मंदिर ही सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाया गया हो, जी हाँ हम बात कर रहे हैं, मोंठ ब्लॉक की जहां अग्रज सरस्वती शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज भी है, जो कि अवैध रूप से बना है, आपको बता दें कि स्कूल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है, और प्रदेश की सरकार लगातार भूमाफियाओं पर कारवाई करने की डींगे हाँक रही है, लेकिन एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि संबंधित विभाग आखिर क्यों आंख बंद कर अपनी जमीन पर कब्जा करवा रहा है, और आपको बता दें कि जिस जमीन पर अवैध कब्जा है, वह तहसील मुख्यालय से महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित है। अब देखना यह होगा कि झांसी जिले के जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी वैसे तो चाहे वह भू माफिया हो, या खनिज माफियाओं पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हैं, क्या शिक्षा के मंदिर की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले इस स्कूल के प्रधानाचार्य के खिलाफ भी कारवाई करने के निर्देश देंगे या फिर यूं ही अवैध कब्जा करके दौड़ाया जाएगा शिक्षा का मंदिर।
लेकिन आज लगभग 5 दिन बीतने के बाद फिर इस पूरे मामले की जानकारी हमारे टाइम समाचार के रिपोर्टर ने तहसीलदार श्रीराम यादव से बातचीत करके जानकारी करनी चाही तो उन्होंने कहा कि मैं मौके पर गया था। और वहां पर अवैध कब्जे की पुष्टि भी मोठ तहसील द्वारा की गई है। लेकिन उन्होंने कहा है कि जल्द ही उस जमीन के पूरे दस्तावेज मंगाकर उक्त मामले की जांच करके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। और उन्होंने बताया कि उस जमीन पर नगर पंचायत का शायद न्यायालय में मामला भी चल रहा है।
लेकिन आपको बता दें कि जब इस पूरे मामले की जानकारी हमारे रिपोर्टर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी गुंजन गुप्ता से बातचीत करनी चाही तो आज फिर उन्हें कई बार फोन लगाने के बावजूद भी फोन नहीं उठा, फिर उसके बाद नगर पंचायत बाबू से बातचीत कर हकीकत जाननी चाही तो इसकी हकीकत कुछ और ही निकली, उन्होंने बताया कि अभी तो फिलहाल न्यायालय में मुकदमा जैसी कोई जानकारी मेरे पास नहीं है, हां लेकिन इतना जरूर है, कि नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जमीन पर संबंधित विद्यालय ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसका नगर पंचायत द्वारा संबंधित विद्यालय के प्रबंधक को नोटिस भी जारी करनेे की बात नगर पंचायत बाबू ने कबूली है, लेकिन अभी तक उक्त पूरे मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं इस पूरे मामले पर अधिकारियों का मंथन चल रहा है, और जांच की बात कहकर मामले को दिन प्रतिदिन टाला जा रहा है, यह देश का कानून है, जिसमें सभी लोगों को जानकारी के बावजूद भी उक्त अवैध कब्जे पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है और अभी वर्तमान सरकार द्वारा एक फरमान भी जारी किया गया था। जिसमें बताया गया था कि प्रदेश में जिन विद्यालयों ने अवैध कब्जा कर रखा है, उन विद्यालयों की मान्यता भी रद्द की जाएगी। लेकिन यह क्या हो रहा है, यहां तो अवैध कब्जा भी है, और सीनाजोरी भी है, और मान्यता भी है, इसमें खास बात यह है कि अभी बीते दिनों हाईस्कूल और इंटर इलाहाबाद बोर्ड ने इस इण्टर कालेज को सेंटर भी बनाया था।
वहीं नगर की जनता का मानना है कि चाहे वह किसी की भी सरकार हो सिर्फ सरकार द्वारा किए गए दावे सिर्फ कागजों में ही रहते हैं। जबकि हकीकत में सरकार अवैध कब्जे जैसी कार्यवाहियों को सिर्फ निचले स्तर पर दिखाते हैं। जैसा कि उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि 2 बीघा जमीन पर किसी का अवैध कब्जा है, तो वह प्रशासनिक अमले द्वारा हटाया जाता है, जबकि जो 20 बीघा पर अवैध कब्जा कर रखा है, वह आज भी किए हुए हैं, कुछ ऐसे ही हालात नजर आ रहे हैं, प्रदेश की कानून व्यवस्था के, अब देखना यह होगा कि कोई कार्रवाई भी होती है या फिर कोई नया फंडा कानून के रखवालों एवं प्रशासनिक अमले द्वारा तैयार किया जाता है।

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