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मानसिक विकार ग्रस्त व्यक्तियों में सर्वाधिक संख्या युवाओं की- प्रो. ज्ञानेन्द्र कुमार

झाँसी | समाज कार्य मानवीय मूल्यों पर आधारित समाज के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है। समाज कार्य के बिना समाज का प्रत्येक क्षेत्र अधूरा है। मानव को मानव से, मानव को समाज से और मानव को प्रकृति से जोडने का कार्य समाज कार्य के द्वारा ही सम्भव है। व्यक्ति की भौतिक, मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक आदि आवश्यकताओं की पूर्ति का काम भी समाज कार्य के माध्यम से ही संभव है।’’ उक्त विचार बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी के समाज कार्य विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘‘पाठ्यक्रम अभिविन्यास कार्यक्रम’’ के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर के समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. संदीप कुमार सिंह ने व्यक्त किये।

 

उन्होंनें कहा कि आज की भागदौड भरी जिन्दगी में व्यक्ति स्वयं से, अपने परिवार से, अपने समाज से और अपने पर्यावरण से समायोजन नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण वह नाना प्रकार की विकृतियों का शिकार हो रहा है, जिसके निदान का काम सामाजिक कार्यकर्ता करता है। सामाजिक कार्यकर्ता ही व्यक्ति को अपने पर्यावरण से समायोजन के योग्य बनाता है।

पाठ्यक्रम अभिविन्यास कार्यक्रम के समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल काॅलेज झाँसी के मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञानेन्द्र कुमार ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में समाज में मनोरोगियों की संख्या में लगातार बढोत्तरी हो रही है, जिसके कारण प्रतिवर्ष आत्महत्याओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। मानसिक विकार ग्रस्त व्यक्तियों में सर्वाधिक संख्या युवाओं की है। उन्होंनें कहा कि बेरोजगारी, प्रेम में असफलता, दाम्पत्य जीवन में असमायोजन, नौकरी से निकाला जाना, विवाहेत्तर सम्बन्धों आदि कारणों से व्यक्ति का व्यक्तित्व विघटित हो रहा है और जब यह अवस्था चरम पर पहुँचती है, तो व्यक्ति आत्महत्या की ओर उन्मुख हो जाता है, जिसे रोकने में सामाजिक कार्यकर्ता मद्द करता है। उन्होंने कहा कि मानसिक एवं चिकित्सकीय क्षेत्र में समाज कार्य पाठ्यक्रम का बडा महत्वपूर्ण स्थान है। भारत सरकार के जितने भी स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहे हैं, सभी में समाज कार्य के विद्यार्थियों के लिए अनेकों अवसर हैं।

 

सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. एम. एल. मौर्य ने कहा कि पाठ्यक्रम अभिविन्यास कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की पढाई के लिए तैयार किया जाता है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है, विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आपको पाठ्यक्रम के व्यवसायिक पक्ष के अनुसार तैयार करें।

 

कार्यक्रम का संचालन डाॅ. मुहम्मद नईम ने व आभार विभाग की समन्वयक नेहा मिश्रा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर विभागीय शिक्षक डाॅ. यतीन्द्र मिश्रा, अनूप कुमार, डाॅ. अभिषेक भारद्वाज, गुंजा चतुर्वेदी सहित समाज कार्य विभाग के विद्यार्थी उपस्थित थे।

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