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भाजपा नेता के बार बालाओं के साथ ठुमके लगाने पर बोले : प्रभारी मन्त्री

झाँसी – प्रभारी मंत्री राजेन्द्र सिंह उर्फ़ मोती सिंह भी गज़ब हैं। कुतर्क गढ़ना कोई उनसे सीखे। आजकल मीडिया के सवालों पर वह जिस अंदाज़ में जवाब दे रहे हैं, वही कतई उनके ज़िम्मेदार होने का बोध नहीं कराता। यह अंदाज कई बार एक “सजग” नागरिक होने के नाते खल जाता है। कई मौकों पर उनके जवाब हास्यास्पद भी होते हैं। साथ ही वह किस युग में जी रहे हैं या आमजन और मीडिया को “बनाने” की कोशिश में लगे हैं, उनकी यह मंशा उन्हें सवालों के घेरे में खड़ा करती है। खैर, जब से झाँसी में आरईएस विभाग के मंत्री राजेन्द्र सिंह उर्फ़ मोती सिंह को प्रभार मिला, तब से उनका यहाँ एक्शन कार्ड रिपोर्ट सुसुप्तावस्था में पड़ा कराह रहा है। कई दौरों के बाद तमाम दिशा-निर्देश तक ही उनकी कार्यवाही सिमटती देखी जा रही है। यहाँ एक कार्यक्रम में तो वह विपक्षी दलों के नेताओं की भी खुलकर मुख़ालफ़त कर चुके हैं। जिसमें एक राज्यसभा सदस्य को बुन्देलखण्ड का सर्वमान्य नेता के तौर पर स्वीकार किया था। इस कार्यक्रम में झाँसी के लगभग सभी पत्रकारों का जमावड़ा था। मगर, इस बयान को सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री के बड़प्पन के रूप में पेश कर दिया गया था, तो दूसरी ओर सनसनीखेज बयान ने भाजपा खेमे में हलचल और कार्यकर्ताओं में निराशा घोल दी थी। प्रभारी मंत्री की यह बयानबाजी स्थानीय भाजपा को भी खलती आ रही है, जिसे लेकर कभी भी गुबार फूटने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
भाजपा विधायक का बालू डीलिंग के ऑडियो वायरल होने पर भी मंत्री का इसी तरह का जवाब उठा रहा मंशा पर सवाल 
मालूम हो कि पिछली बार प्रभारी मंत्री से जब बालू खनन को लेकर सर्किट हाउस में पत्रकारों ने सवाल दागे तो पहले वह असहज दिखे। बाद में उल्टा पत्रकारों पर हावी होकर कुतर्क गढ़ दिया। झूठ को सच में पिरोने की नाकाम कोशिश में सफाई दी कि बालू डीलिंग सम्बन्धी ऑडियो में आवाज़ मऊरानीपुर भाजपा विधायक और पूर्व विधान परिषद के सभापति पुत्र मृगेन्द्र सिंह के बीच की नहीं है। हालाँकि उनके बगल में ही बैठे आरोपी “माननीय” यह पहले ही कुबूल चुके थे कि “ऑडियो में गलत क्या था?” विधायक के इस बयान ने मंत्री की सफाई देने के अंदाज़ पर सवाल खड़े कर दिए। अब नया मामला शनिवार का ही है। चिरगांव क्षेत्र से भाजपा नेता पप्पू राजपूत का बारबाला के साथ ठुमके लगाने ऑडियो वायरल होने से स्थानीय राजनैतिक दलों के पदाधिकारी पार्टी की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जबकि सोशल गलियारों में भाजपा की अच्छी खासी खिंचाई की जा रही है। लोग तरह-तरह कइ कमेंट कर पार्टी के अनुशासन पर सवाल उठा रहे हैं। जब यह मामला पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री के संज्ञान में लाया तो उनका जवाब बड़ा हास्यास्पद था। प्रभारी मंत्री का कहना था कि वीडियो में भाजपा नेता नहीं हैं, बल्कि उनकी फ़ोटो लगाकर विपक्षी साजिशन बदनाम कर रहे हैं।
बताते चलें कि प्रभारी मंत्री के तकिया-कलाम के रूप में अक्सर यह रटा-रटाया जवाब होता है, जिसे मौका मिलते ही वह फेंकने से नहीं चूकते हैं। उनका जिले में इस तरह से गलतियों को इग्नोर करना और पार्टी संविधान के ख़िलाफ़ कार्यों पर पर्दा डालना भाजपा के लिए ही नुकसानदेह कहा जा रहा है। चूँकि जनपद में रस्साकस्सी में उलझी रहने वाली भाजपा प्रदेश की सत्ता में काबिज होने के बाद सांगठनिक रूप से मजबूत नहीं देखी जा रही है।
इधर, संगठन में ज़िम्मेदारी और जवाबदेही तय न होने से कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ रही है खाई
कई मौकों पर स्थानीय पार्टी संगठन प्रमुखों पर तानाशाही रवैये से चलाने का भी आरोप लग चुका है। शुक्रवार को ही भाजपा की नगर निकाय से सम्बंधित बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन अध्यक्ष पर सवाल खड़े किये थे। फ़िलहाल, ज़िला प्रभारी का एका की ओर रणनीति बनाने की बजाय गलत परम्पराओं को बढ़ावा देना ठीक नहीं कहा जा सकता है। इसके अलावा, पार्टी में जवाबदेही तय न करना, फ्रंट पर आकर बिना सच जाने बयान जारी करना पार्टी छवि पर बट्टा लगा रहा है। यह सब कहीं न कहीं उनके लम्बे अनुभव और रूचि पर सवाल खड़े कर रहा है।
सौजन्य-से उदित तिवारी

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