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हुनर के धनी नफीस : बिन आँखों के ये करते है अनोखा काम

झाँसी। शारीरिक अपंगता किसी की मोहताज नहीं होती आज हम आपको झाँसी के एक ऐसे अन्धे मिस्त्री से  आपका परिचय करायेगे जो कि अपने आप में एक मिशाल है ऊपर वाले ने आखें नही दी तो क्या हुआ कहते है कि अगर किसी के अन्दर जीने और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो वह असम्भव को भी सम्भव कर सकता है आखें नहीं भी होने के बाबजूद भी झाँसीके सैंयर गेट के पास छोटी सी दूकान चलाने वाले ” नफीस” सिलाई मशीन  सुधारने का काम करते है और अपने परिवार का पालन पोषण करते है नफीस का यह हुनर की लोग तारीफ करते है नफीस बहुत ही अच्छे तरह और सावधानी से सिलाई मशीन सुधारने का काम करते है नफीस अहमद की आखें पैदायसी बचपन से ही ख़राब है बताते है कि बहुत से डाक्टरों को दिखाया भी है पर आखें सही नही हुई है इन्हें कुछ भी नही दिखाई देता है बस अंदाज से अपना काम करते है अगर मशीन में कोई खराबी सही होने आती है तो मशीन की आवाज से खराबी का पता लगा लेते है कि मशीन में कोन सी या क्या खराबी है और यह मशीन सुधारने का काम बचपन से ही कर रहे है बचपन से अपने पिता के अपनी दुकान पर आते थे और पिता के साथ ही अन्दाज से मशीन सुधारने का काम सीख लिया । घर में कमाने का भार नफीस के कंधो पर अ गया पिता हार्ट के मरीज है पहले पिता ही घर का खर्च चलाते थे  और अब अपने परिवार का भरण पोषण नफीस ही करते है । लोग बताते है कि नफीस के पास बहुत दूर दूर से लोग मशीन ठीक करने आते है लगभग 100 से 150 किलो मीटर से लोग मशीन सही कराने आते है। हर रोज लगभग 400 से 500 रुपए (महीने के 12 से 15 हजार रुपए) की कमाई हो जाती है।
 

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