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अग्रज इण्टर कालेज के अवैध कब्जे के मामले में एसडीएम,तहसीलदार,अधिशासी अधिकारी ऐसे खेल रहे हैं वाॅलीवाॅल

धीरेन्द्र रायकवार टाइम समाचार ब्यूरो रिपोर्ट झांसी

मोठ/झांसी – प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा स्कूल, मन्दिर, मस्जिद, सरकारी या अन्य अवैध कब्जा हटाये जाने के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एंटी भू माफिया एस्कॉर्ट भू माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई एवं अवैध कब्जा हटाए जाने के लिए सख्त निर्देश यूपी के CM द्वारा दिये गये। जिसमें वर्तमान शासन द्वारा एक शासनादेश आया था। जिसमे नगर की अधिशाषी अधिकारी को भी एक मजिस्ट्रेट का पावर भी दिया गया। जिससे भूमाफियों पर कार्यवाही हो व तहसीलदार तो पहले से ही मजिस्ट्रेट हैं। सरकारी जमीन तहसीलदार की देखरेख में होती है। उसकी पूर्ण जिम्मेदारी भी तहसीलदार की ही होती है।  लेकिन यह क्या हो रहा है यहां तो साफ तौर पर यह मांन लीजिए कि उत्तर प्रदेश के CM के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का काम किया जा रहा है। उक्त अग्रज सरस्वती शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज द्वारा किये गये अवैध कब्जे के मामले को तहसील स्तरीय प्रशासनिक अमले द्वारा किस प्रकार वॉलीबॉल मैच की तरह खेला जा रहा है। कुछ ऐसे ही हालातों से हम आपको रूबरू कराते हैं।

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के तहसील व नगर मोंठ का यह मामला है। जहां तहसील मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर अग्रज सरस्वती शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज है। जो कि रकबा नंबर 703 संस्थान व इंटर कॉलेज के प्रबंधिका राधा देवी पत्नी दलबीर सिंह यादव के नाम है। जिसपर अग्रज सरस्वती शिक्षा इंटर कॉलेज बना हुआ है। जबकि उसी के बगल में लगा हुआ रकबा नंबर 700/1 है। जोकि अभिलेखों में सहकारी संघ लिमिटेड मोंठ के नाम दर्ज है।
जिसपर संबंधित विद्यालय द्वारा पूर्व सत्ता की हनक में विद्यालय की आड़ लेकर सरकारी जमीन पर अवैध  कब्जा कर लिया था। नगर वासियों के कई बार शिकायत करने व मीडिया में मामला पहुंचने के बावजूद भी प्रशासनिक अमला अब भी आखिर कैसे और क्यों मौन बैठा है। कुछ ऐसी ही चर्चाओं का बाजार नगर में आजकल गर्म चल रहा है। अवैध कब्जा करके उसी में अपना निवास भी बनाए हैं। जिसके संबंध में SDM मोंठ से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वह सहकारी संघ लिमिटेड मोंठ के नाम जमीन है। वह नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती है। जब इस पूरे मामले की लिखित रूप से उत्तर प्रदेश के CM द्वारा चलाए जाने वाले आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत दर्ज की जाती है तो उसपर भी तहसीलदार मोंठ द्वारा लिखित रूप से इस चीज को स्वीकार रहे हैं कि उक्त जमीन सहकारी संघ लिमिटेड मोंठ के नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। उस पर संबंधित विद्यालय ने अवैध कब्जा कर रखा है और यह सारी बात में नही कह रहा इस बात को खुद मोंठ तहसीलदार साहब श्रीराम यादव लिखित रूप से यह कह रहे है और उन्होंने आईजीआरएस के जवाब में  लिखा भी है कि महोदय प्रकरण में भूमि संख्या 700/1 सहकारी संघ के नाम दर्ज कागजात है। उक्त भूमि नगर पंचायत सीमा क्षेत्र के अंतर्गत है। अतः राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई अपेक्षित नहीं है। फिलहाल में अब एक बात तो साफ हो गई है कि उक्त जमीन पर संबंधित विद्यालय का अवैध कब्जा है जब इसकी जानकारी तहसीलदार श्रीराम यादव खुद कह रहे हैं कि वह नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती है तो इसी मामले को लेकर इसकी पुष्टि करने के लिए अधिशासी अधिकारी मोंठ गुंजन गुप्ता से बातचीत की गई। तो जरा आप उनका भी जवाब सुन लीजिए उन्होंने कहा कि वह तो सहकारी संघ लिमिटेड के नाम जमीन है। भले ही मेरी नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती है। लेकिन इस पर नगर पंचायत कार्यवाही नहीं करेगी। लेकिन जब उन्हें इस बात का एहसास दिलाया गया कि मेम साहब आखिर वह जमीन है तो आपके नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत और इस बात को लिखित रूप से तहसीलदार साहब खुद कह रहे हैं तो फिर उनका जवाब कुछ और ही निकला उन्होंने कहा कि उक्त जमीन के संबंध में मैंने 19 अप्रैल 2018 को लिखित रुप से SDM मोंठ को यह पत्र भिजवाकर मांग की है कि लेखपाल द्वारा उक्त कब्जे के मामले की जांच कराकर अवैध कब्जा चिन्हित किया जाए।
अब ऐसे में एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भूमाफिया के खिलाफ लाख कोशिशें कर रहे हैं जिससे अवैध कब्जे हटाए जाएं और अभी शासन द्वारा एक शासनादेश भी जारी किया गया है। जिसमें अधिशासी अधिकारी को एक मजिस्ट्रेट का पावर दिया गया है। जिससे वह नगर में किए गए अवैध कब्जों पर कार्रवाई कर सकें। लेकिन यहां तो अवैध कब्जा जैसी भूमाफियाओं पर कोई कार्यवाही होती नहीं दिखाई दे रही है। अधिशासी अधिकारी तो दूर यहां तक कि तहसीलदार भी इसपर कार्यवाही करने से कतराते नजर आ रहे हैं। इस पूरे मामले को तहसीलदार और sdm किस प्रकार नगर पंचायत के पाले में फेंकने की कोशिश कर रहे हैं। नगर पंचायत फिर SDM मोंठ से लेखपाल द्वारा जमीन की नाप करके कार्रवाई की बात कर रही हैं। यह मामला लगभग एक माह से इसी प्रकार तहसील स्तरीय सभी अधिकारी इसी प्रकार एक दूसरे के पाले में वॉलीबॉल मैच की तरह खेला जा रहा है। लेकिन ऐसे में मोंठ नगर की जनता सिर्फ यह जानना चाहती है कि यह तो संबंधित अधिकारियों ने साफ जाहिर कर दिया है कि उक्त जमीन पर अवैध कब्जा है। लेकिन इस पर कार्यवाही कौन करता है। लगातार अधिकारी वॉलीबॉल मैच का खेल खेलने में जुटे हुए हैं। लेकिन कार्रवाई करने से सभी साफ तौर पर कतराते नजर आ रहे हैं। जब भी संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले पर बातचीत की जाती है तो वह पूरे मामले का ढुलमुल रवैया एवं गोलमोल जवाब देते हैं। अब देखना यह होगा कि आखिर इस अवैध कब्जे के मामले को कब तक उच्च अधिकारी अपने संज्ञान में लेते हैं और इस पर कार्यवाही करते या फिर यूं ही तहसील स्तरीय अधिकारी अवैध कब्जे के मामले में वॉलीवॉल मैच खेलते हुए नजर आएंगे।

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